भारत neteller जुआ गैर जुआ

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लेकिन ताश के जरिये कुछ लोग जुआ भी खेलते हैं। वे ज्यादातर रूपयों को दांव पर लगाते हैं। इस तरह के जुए पर रोक को भारत में एक एक्ट के तहत अपराध करार दिया गया है। क्या ताश खेलना अपराध है? दोस्तों, आज हम आपको इसी विषय पर विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे। आइए शुरू करते हैं-

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माना जाता है कि ताश की खोज नौवीं सदी में चीन में हुई थी। तांग वंश के राजा यिजोंग की बेटी राजकुमारी लोंगचांग टाइम पास करने के लिए वेई कुल के सदस्याें के साथ पेड़ों पत्तियों से यानी लीफ गेम (leaf game) खेला करती थी, जिसने कालांतर में ताश का रूप ले लिया। अब आपके दिमाग में यह प्रश्न अवश्य आ रहा होगा कि आखिर ताश की गड्डी में केवल 52 पत्ते ही क्यों होते हैं। home (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); भारत में जुआ की परिभाषा एवं सजा को लेकर अभी सार्वजनिक द्यूत अधिनियम 1867 लागू है। ताश के पत्ते के वर्तमान डिजाइन का आविष्कार 1745 में एजन नाम के फ्राांसीसी निर्माता ने किया। हालांकि भारत की बात हो तो आपको बता दें कि यहां ताश का खेल शुरू कराने का कार्य मुगल बादशाह बाबर ने किया। ‌‌‌‌उस वक्त इसे टाइम पास करने के लिए इस्तेमाल किया गया। ‌‌ यदि आपने महाभारत पढ़़ी होगी तो निश्चित रूप से पांडवों की द्यूत क्रीड़ा के बारे में पढ़ा होगा, जिसमें पांडव लगातार हारते हैं। यहां तक कि धर्मराज माने जाने वाले युधिष्ठिर अपनी पत्नी द्रौपदी तक को दांव पर लगाते हैं एवं हार जाते हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण आकर उनकी लाज बचाते हैं। उनकी रक्षा करते हैं। दुर्योधन के मामा शकुनि को द्यूत क्रीड़ा में निपुण बताया गया है। इसके साथ ही आनलाइन जुआ, घर में जुआ संचालन एवं सटेटबाजी को गैर जमानती अपराध बनाने की भी सिफारिश की है। पुलिस को अधिक शक्ति देने के लिए भी कानून तैयार किया है।

ताश के माध्यम से बाजी लगाई जाती है। इसमें घर को छोड़कर बाहरी लोग शामिल होते हैं एवं दांव पर कोई कीमती सामान अथवा धन होता है। यानी दांव का कोई न कोई हितधारी होता है। मित्रों, इस वक्त आनलाइन जुआ यानी online gambling का चलन बहुत बढ़ रहा है। इसके दुष्प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार इसके प्रति बहुत सख्त हो गई है। उसने उत्तर प्रदेश पब्लिक गेमिंग रोकथाम बिल की मसौदा रिपोर्ट राज्य विधि आयोग (state law commission) की अध्यक्षता में तैयार की है। बेंच ने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य बनाम अभिजीत सिंह पंवार के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले की रोशनी में सिंगल जज के फेसले को बरकरार नहीं रखा जा सकता। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक उम्मीदवार के द्वारा उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों को लेकर खुलासा किए जाने के बाद भी नियोक्ता के पास उम्मीदवार की उपयुक्तता पर विचार का हक होगा।

इस आधार पर ताश के 52 पत्ते साल के 52 सप्ताह का प्रतिनिधित्व (represent) करते हैं। ताश के एक सेट को पैक अथवा डेक पुकारा जाता है। एक खेल के दौरान एक बार में एक खिलाड़ी जितने पत्तों के सब सेट उठाता है, उसे हैंड कहा जाता है। इसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है। यहां वर्तमान में सार्वजनिक जुआ अधिनियम के अंतर्गत महज एक साल की जेल एवं एक हजार रूपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। हालांकि राज्य विधि आयोग इसे और कड़ा बनाए जाने के पक्ष में है। उसने सजा के तहत जुर्माने को बढ़ाकर पांच हजार करने की सिफारिश की है। मित्रों, सामान्य रूप से जुए को एक बुराई की संज्ञा दी गई है। ताश के माध्यम से भी जुआ खेला जाता है, इसलिए इससे भी बचना जरूरी है। इससे लोगों को बदनामी तो मिलती ही है इसके अलावा लोग लाभ की अभिलाषा में कई बार बड़ी हानि झेलते हैं। उनके सिर पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है। याचिकाकर्ता को एक काॅलोनी में ताश खेलने के लिए 1867 के अधिनियम की धारा (section) 13 के अंतर्गत दोषी ठहराया गया था। आरोप था कि उसने इस धारा के तहत नैतिक पतन का कार्य किया है। स्क्रीनिंग कमेटी का कहना था कि वह अनुशासित बल में नौकरी के लिए फिट नहीं है। कई लोग तो इस बोझ से इतने त्रस्त हो जाते हैं कि वे आत्महत्या तक कर लेते हैं। अतः जरूरत इस बात की है कि इससे जितना दूर रह जाए उतना ही बेहतर है। ताश की गड्डी को घर के मनोरंजन तक ही सीमित रखा जाए। उसे जुए के रूप में तब्दील होने से बचाया जाए।

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